पर्यावरण के प्रति मेरी सोच
सदियों से बह रही थी ये नदियाँ,
परिस्थितियों की कहानी लायीं थी ये ज़मीं।
परंपराओं का आधार, जीवन का संचार,
धूल में उद्धृत रही वाणिज्य की तमाम प्रचार।
ताजगी थी इस जलमग्न जीवन की वजह,
किन्तु आज रही यहाँ मौत की अभियान।
खेत बदल गए रेतीले सागर,
धारा में कर गयी वनस्पतियों की हत्या करार।
खाद्य प्रणाली की वजह से मनुष्य चिंतित,
अपनी लालसा में जीवन की हानि हित।
समुद्र के किनारे थे घने वन उगते,
परंतु बिना संतुलन खत्म हुई वनवासी धारा सी बहती।
प्राणीयों की छोटी-बड़ी जीवनरेखा,
जुड़ी होती थी सूक्ष्मता से नदियों से।
अब उसके साथी बन गया है निष्पाप कपड़े,
सब जगह दिखाई देते हैं विषैले रंग।
संसार में प्रदूषण का राज,
देता है अशांति, हर जीव को चोट।
इस रेतीले खेत में वनस्पति नहीं उगती,
पर्यावरण की सूखी हो रही है रोटी।
इतनी बेजोड़ संख्या में रेत,
मिल रही है धरती माता की हर जगह।
क्या रहा इस उछलती हुई धूल का असर,
हरा-भरा चेहरा देखने को है बेहाल।
जीवनरेखा पर छिंदी लग गयी है नदियों की,
स्वाभाविक स्थिति से हो रही है दूरी।
कृपया करके रोकें इस अत्याचार को,
बचा लें पृथ्वी को जीवन की भूमि को।
बदल दे नदियों की धार, बेड़ा बदल दे रेत,
हमेशा के लिए गंगा यमुना बन जाए बेहतर।
पृथ्वी के हर तरफ उठ रही है पुकार,
जगाएं आत्मसमर्पण, नदियों को बचाएं प्यार।
फूलों की लहरें जगमगाएं नदियों के किनारे,
जीवन का नाटक बजाएं सुर, रंग-बिरंगी परियां।
वृक्षों के नीचे बहे यमुना की धारा,
आकर्षक दृश्य सजाएं प्रकृति की सँवारी।
जल जीवन का महत्व जगाएं हम,
अहिंसा की प्रणाली सिखलाएं हमें कम।
हरियाली से भरे वनों का दृश्य बनाएं हम,
नदियों की गहराईयों में प्रेम बहाएं हम।
धरती की रक्षा करना है हमारा कर्तव्य,
वनस्पति और प्राणियों को दें उन्नति।
रेतीले खेतों को जड़ से बदल दें,
प्रकृति को दें नयी शक्ति, नयी तरंगति।
संगठित रूप से करें इसका विरोध,
अवैध खनन का हो पूरा निषेध।
हमारी नदियों को बचाएं, वातावरण को सुरक्षित करें,
प्रकृति को सम्मान और प्रेम से भरें।
आओ इस प्रयास में हाथ मिलाएं,
नदियों की संस्कृति को हम संवारें,
वनस्पति और जीवन को हम प्यार से पालें।
पर्यावरण के संरक्षण में आगे आएं,
जल-जीवन की महिमा को हम सबके सामने प्रगट करें।
जनजागृति का संदेश फैलाएं हम,
अत्याचारी खनन को हम रोकें दमभर से।
वनस्पतियों को संरक्षित करें हम वार,
हरा-भरा पर्यावरण बनाएं हम प्यार से।
धरती माता की करें श्रद्धा वंदना,
वनस्पति, प्राणी, जल सबको जीवन देना।
हमें संगठित होकर इस युद्ध में जाना है,
प्रकृति को बचाना हमारा परम कर्तव्य बना है।
संगठन करें हम नदियों के संरक्षण का,
जीवन की धारा को बनाएं स्वच्छ और शुद्ध।
वनस्पतियों को बढ़ावा दें हर घर में,
प्रकृति के साथ हम हरदम बने रहें संयुक्त।
संघर्ष करें हम वनस्पतियों की सुरक्षा के लिए,
प्राणियों के न्याय की आवाज उठाएं।
जलमग्न नदियों को फिर से पुनर्जीवित करें,
वन-प्राणियों के संग सदैव हम निभाएं संवाद।
आओ मिलकर प्रकृति को बचाएं,
नदियों की स
खुशहाली वापस लाएं और प्रकृति को गांवे,
हरियाली से भरे नदियों को हम बचाएं।
अत्याचार से परिस्थिति को मुक्त करें,
वनस्पति, प्राणी और मनुष्य को संवारें।
प्रदूषण को कम करें, जल संरक्षण करें,
हर व्यक्ति को जागरूकता में बढ़ाएं।
जनहित की ओर अपने कदम बढ़ाएं,
नदियों की खुशहाली के लिए हर प्रयास करें।
वन्यजीवों के घर को हम संरक्षित करें,
वन्य प्राणियों के संरक्षण में विशेष बनें।
हरे-भरे जंगलों को हम बचाएं,
जीवन की अमूल्य संपदा को हम गांवे।
संगठन करें हम जनजागृति का विज्ञान,
संवृद्धि के रास्ते पर प्रकृति की चर्चा।
एकता का उदाहरण हम सब बनें,
नदियों के प्रेम से भरे हर घड़ी में हँसा।
इस प्रकृति संग्राम में हम अग्रसर हों,
अत्याचारी खनन को हम सब मिटा दें।
प्रकृति की सुंदरता को हम संवारें,
नदियों को वनस्पतियों से फिर से अभिभूत करें।
आओ चलें हम सब, हाथ मिलाएं,
प्रकृति की सुरक्षा में संघर्ष करें।
संगठित हो जाएं हम प्रकृति के संरक्षण में,
अपनी आवाज उठाएं, जागरूकता फैलाएं।
जल-जीवन के महत्व को हम जानें,
नदियों की धारा में हम साथ बहें।
खनन के शोर को रोकें, अत्याचार से डरें,
पर्यावरण की सुरक्षा में सब मिलकर काम करें।
वनस्पति और जीवन की रक्षा करें,
नदियों को स्वच्छ और प्राकृतिक रूप दें।
फ्लोरा और फौना के लिए अभिभूत हों,
पक्षियों के घरों को हम संरक्षित रखें।
जंगलों की छाँव में हम विश्राम करें,
प्रकृति की सुंदरता का आनंद लें।
नदियों की मधुर लहरों के साथ बसे,
प्रकृति के रंगीन वनों में खो जाएं।
हरे-भरे तटों पर खेलें, विश्राम करें,
नदियों की गोदी में अपने अरमान पूरे करें।
संगठित हो जाएं, प्रयास न थमे,
प्रकृति को बचाने में हम समर्पित हों।
नदियों की पुकार सुनकर उठें हम,
हर जीव की खुशहाली को हम सब मनाएं।
प्रकृति के संग रहें, समर्पित रहें,
अपने कर्तव्यों को हम निभाएं सदैव।
प्रकृति की अंगियों में खो जाएं हम,
नदियों के पावन जल में रंग जाएं हम।
वनस्पति और प्राणी से मिल जुलकर,
पर्यावरण को बचाने की आवाज उठाएं हम।
खनन के विकारों को दूर भगाएं हम,
जीवन को अविरल और शुद्ध बनाएं हम।
नदियों के जल में हरियाली फैलाएं,
जीवन के नये रंग उजागर करें हम।
जलवायु परिवर्तन से जंग चढ़ाएं हम,
प्रकृति की रक्षा में सब मिलकर काम करें।
बचाएं वनस्पति और पशु-पक्षियों को,
नदियों की शांति और खुशहाली बनाएं हम।
जीवन की धारा में प्रेम बहाएं हम,
प्रकृति की गोदी में आराम करें हम।
नदियों की धुंधली सांझ में भटकें,
अपनी मनोहारी सुंदरता में खो जाएं हम।
प्रकृति के लिए आवाज़ उठाएं हम,
अपने उद्यम से उजाला फैलाएं हम।
नदियों की लहरों को शांति सिखाएं,
प्राकृतिक सौंदर्य को हम सब खोजें हम।
आओ, हम सब एक संगठन बनाएं,
प्रकृति के संरक्षण का प्रतिज्ञान लें।
नदियों की धारा में हम संग बहें,
प्रकृत समय की प्रतीक्षा न करें, आगे बढ़ें हम,
नदियों के संरक्षण में और प्रयास करें हम।
जल-जीवन के महत्व को हम समझें,
प्रकृति की रक्षा में सबको जोड़ें हम।
पौधों को लगाएं, वृक्षारोपण करें,
वनस्पति की संरक्षा में अपना योगदान दें।
जलवायु परिवर्तन के साथ लड़ें हम,
नदियों को स्वच्छ और प्राकृतिक बनाएं हम।
हरियाली से भरे नदी किनारे जाएं हम,
प्रकृति के अनुभवों को हम सहज महसूस करें।
वन्यजीवों के घर को हम संरक्षित रखें,
नदियों की सुंदरता को हम सबसे प्यार करें।
प्रदूषण को कम करें, स्वच्छता बढ़ाएं,
नदियों को अपनी गोदी में संवारें हम।
जल और जीवन के महत्व को हम समझें,
प्रकृति के संग हम सदैव निरंतर बहें हम।
प्राकृतिक संतुलन को हम संरक्षित रखें,
नदियों के पावन जल में हम रंग जाएं।
जीवन के लिए हम सब एक संघ बनें,
प्रकृति की खुशहाली के लिए साथ चलें हम।
आओ, जागें, करें प्रकृति की सेवा,
नदियों के नवीनतम योजनाओ
जल संरक्षण के उपाय अपनाएं, उदाहरण बनें हम,
नदियों के प्रेम से हर दिन जीने की आदत बनाएं।
अनुकूल जलवायु के लिए प्रयास करें हम,
नदियों की रक्षा में सब मिलकर काम करें।
जल वितरण को समझें, बचत करें हम,
प्रकृति के संग सम्पर्क में रहें हम।
जलाशयों को साफ रखें, प्रदूषण मिटाएं हम,
नदियों की प्राकृतिकता को हम बनाएं नाम।
जलसंपदा की बचत को प्राथमिकता दें,
नदियों के जल को हम सुरक्षित रखें।
जलधारा में नए संयम को अपनाएं हम,
प्रकृति की रक्षा में हम आगे बढ़ें हम।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करें,
नदियों की संरक्षा में नए संभावनाओं को खोजें।
जलसंयम की भावना को अपनाएं हम,
नदियों के सम्पदा को हम सब महसूस करें।
प्रकृति के साथ एक संगठन बनें हम,
नदियों के प्रेम से हम बढ़ते जाएं।
जल की महत्वपूर्णता को हम समझें,
प्रकृति के संग हम सदैव जुड़े रहें हम।
नदियों की प्राकृतिकता का हम सम्मान करें,
जलधारा में हम सब व
हरियाली से भरी नदी किनारे घूमें हम,
प्रकृति के अनुभवों को हम महसूस करें।
वन्यजीवों की संरक्षा करें हम,
नदियों की जीवनदायिनी माता का सम्मान करें।
जल संरक्षण के लिए अभियान चलाएं हम,
नदियों की स्वच्छता को हम सुनिश्चित करें।
संगठित होकर पर्यावरण योजनाएं बनाएं हम,
नदियों के प्रकृतिक सौंदर्य को हम बचाएं।
प्राकृतिक जलस्रोतों को हम संरक्षित रखें,
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष करें।
नदियों के जल में जीवन का आदान-प्रदान करें,
प्रकृति के संग हम हमेशा चलें हम।
प्रकृति के संग एकता का संदेश दें,
नदियों की गोदी में हम आराम करें।
जल-जीवन की सुरक्षा करें हम,
नदियों के संरक्षण में हम सब मिलकर काम करें।
आओ, हम सब एक संघ बनें,
प्रकृति के संरक्षण के लिए आगे बढ़ें।
नदियों के लिए प्रेम और समर्पण दिखाएं,
प्रकृति की सुंदरता को हम सब समझें।
समय न गंवाएं, आगे बढ़ें हम,
नदियों के संरक्षण में सदैव समर्पित रहें।
बिहार की धारा जहां बहती है,
प्रकृति की कहानी सुनती है,
पूर्व में समृद्ध, अब रोती हैं,
रेत की लूट से हैं चोट खाती हैं।
गंगा से कोसी, सब जीवन संचार,
नदीयों ने दिया जीवन का आदार,
पर लालच ने घेरा उनकी धार,
खनन से होती हैं नष्ट हर वार।
हे समाज, जागो अपने हृदय को,
प्रकृति की पुकार सुनो तो,
नदियों की रक्षा कीजिए संग,
हमारे अस्तित्व को रखिए संभाल।
सरकार, यह आपकी गहरी अपील,
बचाइए नदियों को विषय सील,
कानून को प्रचारित कीजिए जग,
संरक्षण करिए, बचाइए अगर।
जागरूकता बढ़ाएं, जनता को शिक्षा,
रेत के अत्यधिक प्रभावों का विज्ञान,
विकास के नए तरीके प्रमोट कीजिए,
प्रकृति का संतुलन बनाएं पूर्ण।
क्योंकि नदियाँ हैं महत्वपूर्ण,
वनस्पति और जीव उनकी अमर,
उनके नष्ट होने से जीवन होगा दुर्भाग्य,
बचाएं नदियों को, ऐसी है आपाधापी।
हम सब मिलकर रोकें नष्टी की रफ्तार,
नदियों को पुनः पाने की कड़ी मेहरबानी करें,
संयम और प्रेम से अपना हाथ बढ़ाएं,
पर्यावरण की रक्षा करें, इसी की पहचानी।
